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आई.आई.आर.एस तथा आई.टी.सी-
नीदरलैंड के संयुक्त तथ्वाधान में एक आपसी सहयोग
की परियोजना चल रही है। इसके अंतर्गत सन् 1995-2000
की अवधि में वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों की क्षमताओं
को सवंर्धित किया गया ताकि भू-प्राकृतिक प्रणाली तथा
प्राकृतिक संसाधनों के विकास हेतु प्रयुक्त अनुप्रयोगों
के क्षेत्र में सुविधाएं, एवं पर्यावरण नियोजन एवं
प्रबंधन किया जा सकें।
भारत में सीमित संसाधनों के रहते सतत् विकास में
रूकावट एक समस्या है। विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं की घटना
के समय पर्यावरण आंकलन एवं आपदा प्रबंधन हेतु भू-सूचना
के क्षेत्र में क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण की
आवश्यकताएं बढ़ जाती है। इसके संवर्धन की दिशा में,
आई.आर.एस साथ आई.टी.सी- के संस्थागत विकास सहयोग के
द्वितीय चरण में भू-सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग
द्धारा पर्यावरणक्षरण निम्नीकरण तथा आपदाओं के द्धारा
उत्पन्न समस्याओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस परियोजना में क्षमता निर्माण, पाठ्यक्रमों को
विकसित करने, केस अध्ययनों में वृद्धि कर अनुप्रयोग तथा
संरचनात्मक ढांचों के निर्माण की ओर ध्यान दिया जाएगा।
नेटवर्किंग अनुभवों के आदान-प्रदान तथा प्रौद्योगिकी
के संबंध में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर इंटरफेस को
सशक्त बनाया जाएगा। द्वितीय चरण परियोजना में डेल्फ्ट
तथ डब्ल्यू-यू वागेनिन्जेन भी भागीदार हैं। जी.डी.टी.ए
(फ्रांस) ने भारत-फ्रांस सहयोग के अंतर्गत इसरो के साथ
प्रशिक्षण एवं शिक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक
समझौता किया था। इसके अंतर्गत आपसी सहयोग द्वारा
प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु सुदूर संवेदन एवं
भौगोलिक सूचना अनुप्रयोगों में प्रशिक्षण, शिक्षण एवं
अनुसंधान किया गया। परियोजना के अंतर्गत निम्न क्षेत्रों
में आपसी सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया:
(क) परियोजना कार्यों के लिए स्नातकोत्तर
डिप्लोगा (आर.आई.आर.एस) तथा सीटेल (जी.डी.टी.ए) विद्यार्थियों की अदली-बदली
(ख) पाठ्यक्रमों पर विचार-विमर्श हेतु फैकल्टी
अंतरण, तथा
(ग) विशिष्टता वाले क्षेत्रों में अनुभवों का
आदान-प्रदान। विश्व खाद्य संगठन,
रोम ने आई.आई.आर.एस को एल.सी.सी.एस प्रणाली द्वारा
भूमि अनुप्रयोग एवं अच्छादन मानचित्रीकरण के प्रशिक्षण
हेतु मान्यता प्रदान की है। इसके तहत अब तक तीन
प्रशिक्षण कार्यक्रम एशिया-प्रशांत क्षेत्र के
प्रतिभागियों हेतु सम्पन्न किये जा चुके है।
मानचित्रीकरण पर एक रिपोर्ट भी विश्व खाद्य संगठन को
भेजी जा चुकी है।
आई.टी.टी.ओ/जोफ्का
(जापान) एवं आई.आई.आर.एस- सक्रिय रूप से
इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिंबर संगठन (आई.टी.टी.ओ) की अर्ध-विशेषज्ञ प्रणाली के प्रयोग द्वारा वन क्षेत्र
सघनता मानचित्रण के प्रतिपादन एवं विका की परियोजना
में शामिल रहे हैं। आई.टी.टी.ओ ने वन क्षेत्र संघनता
मानचित्रण में आई.टी.टी.ओ की सदस्यता वाले देशों के
वनाधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के
लिए आई.आई.आर.एस को मान्यता प्रदान की है। इस कार्यक्रम
के तहत आई.आई.आर.एस तथा जोफ्का (जापान समुद्रपार वन
परामर्श एसोसिएशन) द्वारा दो प्रक्षिशण कार्यक्रम
आयोजित किए गए हैं।
यूनेस्कों द्वारा
आई.आई.आर.एस को पर्यावरण आकलन तथा आपदा प्रबंधन हेतु
भू-सूचना पर आइ.आइ.आर.एस-,आई.टी.सी-, आई.एस.ईर् ,
डब्ल्यूयूआर के द्वारा आपदा निम्नीकरण कार्यक्रम के
लिए क्षमता निर्माण हेतु प्रशिक्षण केन्द्र की मान्यता
प्रदान की हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत आई.आई.आर.एस विविध
विकासरत् देशों के लिए आपदा न्यूनीकरण तथा निम्नीकरण
पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। ऐसा
प्रथम पाठ्यक्रम अगस्त सितम्बर 2002 के दौरान
सी.एस.एस.टी.ए.पी के साथ आयोजित किया गया जिसमें यूनेस्को ने दक्षिण
एशियाई देशों से छ: छात्रवित्तियां उपलब्ध करायीं।
आई.आई.आर.एस- ने स्विट्जरलैंड
के जेनेवा स्थित विश्व मौसम विज्ञानी संगठन
(डब्ल्यू.एम.ओ) के साथ अनुबंध किया हैं इस अनुबंध का
प्रमुख लक्ष्य प्रशिक्षण एवं शिक्षण द्वारा क्षमता
निर्माण, कृषि-मौसम विज्ञान, जल-मौसम विज्ञान तथा
पर्यावरण आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उपग्रह सुदूर
संवेदन तथा
जी.आई.एस अनुप्रयोगों में संयुक्त
अनुसंधान है। इस अनुबंध का पहला कदम आई.आई.आर.एस में
आयोजित कृषि-मौसम विज्ञान में उपग्रह सुदूर संवेदन तथा
जी.आई.एस अनुप्रयोगों पर प्रशिक्षण कार्यगोष्ठी रही ।
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